Posts

Showing posts from September 23, 2018

अपनी शिकस्त की आवाज़ मंटो

Image
नंदिता दास अभिनय के साथ-साथ फिल्म-निर्देशन में भी बिलकुल अलग पायदान पर खड़ी हैं. फिल्म  ‘ फ़िराक़ ’ नंदिता द्वारा निर्देशित उन एक-दो फ़िल्मों में से है जो गोधरा के बाद गुजरात में मुस्लिमों के भय , आशंकाओं और समाज में अलग - थलग कर दी गई क़ौम की कहानी कहती है . जिन लोगों ने फ़िल्म देखी है वे जानते हैं कि फ़िल्म बनाने का यह शायद नंदिता का अपना तरीक़ा है जहाँ वह एक केंद्रीय कहानी और पात्र को बीच में रखकर उसके पूरक के रूप में अन्य कहानियाँ भी कहती चलती हैं . उनके इस कहन के ढंग को हमने उनकी फ़िल्म फ़िराक़ में भी देखा था और बिलकुल यही अंदाज़े बयाँ हम उनकी नयी फ़िल्म ‘ मंटो ’ में भी देखते हैं . यहाँ उर्दू अदब के अज़ीम अफ़सानानिगार सादत हसन मंटो की ज़िंदगी ख़ुद एक कहानी है और वे स्वयं कहानी के पात्र और उनकी इस कहानी को मुकम्मल करती है उनकी ही लिखी चार कहानियाँ मसलन दस रूपए का नोट, सौ वाट का बल्ब, खोल दो, ठंडा गोश्त, टोबा टेक सिंह और उनके पात्र .          फ़िल्म ‘ मंटो ’ में नंदिता ने बँटवारे के आस - पास के समय को जीवंत तो किया ही है साथ ही उन संक...