बायोपिक या नीरज पाण्डेय की फेयरी टेल; एम.एस. धोनी :द अनटोल्ड स्टोरी
एक बेहतरीन बायोपिक किसे कह सकते हैं?मैं जब एम.एस धोनी:द अनटोल्ड स्टोरी देख रहा था तब यही सवाल मेरे दिमाग़ में था क्यों कि यह फ़िल्म देखने का एकमात्र मक़सद यह था कि यह फ़िल्म एक जीवित क्रिकेट खिलाड़ी के जीवन पर है और इसे उसकी बायोपिक कहा जा रहा था और इसे मैं इसलिए देखने नहीं गया था कि यह धोनी पर बनी फ़िल्म है और मैं धोनी और क्रिकेट का कोई बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ.मैंने यह फ़िल्म विशुद्ध रूप से अपनी सिनेमा के प्रति रुचि के चलते देखी और इस फ़िल्म को देखते हुये मेरे सामने मेरे द्वारा पहली बार समीक्षा की गई बायोपिक फ़िल्म 'पान सिंह तोमर' से लेकर 'अ ब्यूटिफ़ुल माइंड', 'सिंडलर्स लिस्ट' सहित दुनिया की अन्य दूसरी फ़िल्में थीं. मैं यह बिलकुल समझना चाहता हूँ कि नीरज पांडेय ने 'एम.एस. धोनी' बनाते हुये धोनी के पैदा होने से लेकर लोगों द्वारा धोनी के बारे में जानी हुई बातों को क्यों अपनी इस बायोपिक फ़िल्म में शामिल किया होगा जिसमें पर्याप्त एडिटिंग की गुंजाइश थी या फ़िल्म के स्क्रीन प्ले में वे पहलू न होते तो भी धोनी के बारे में जो कहा जाना है उसमें शायद क...