अन इन्सिग्निफिकेंट मैन:निकट अतीत का इतिवृत्त नहीं है सिर्फ
जब फ़िल्म ‘ कटियाबाज ’ आई थी तो बहुत लोगों ने विश्वास नहीं किया था कि ऐसे भी कोई फ़िल्म बनाई जा सकती है जहाँ चलती फिरती दुनिया ही स्क्रिप्ट है ..सड़कों पर इधर-उधर दौड़ भाग में लगे लोग ही फ़िल्म के पात्र हैं ..फ़िल्म में सारी संवेदनाएँ , तनाव हो सकते हैं जो वेल स्क्रिप्टेड और मंझे हुये अभिनेता , अभिनेत्रियों के अभिनय वाले सिनेमा में हमें देखने को मिलते हैं..इस बात को ‘An Insignificant Man’ ने किंचित एक बड़ा आयाम लेते हुये स्थापित कर दिया है कि हां ऐसा सिनेमा भी बनाया जा सकता है.. इस फ़िल्म को न सिर्फ़ एक राजनीतिक पार्टी उसके नेताओं के बनने , उनके आपसी मतभेदों , उनके उन तमाम लोगों के साथ सम्बंधों , उन लोगों के विश्वासों को समझने के लिए देखना चाहिए ..हालाँकि यह बिलकुल निकट अतीत की ही बात है जो अभी हम सभी के ज़ेहन में बासी नहीं हुई..बल्कि उन एहसासों , संवेदनाओं , विचारों , कुटिलताओं , प्रहसनों , अहमकपना को बिलकुल उनके आदिम रूपों में देखने के अनुभवों के लिए भी देखना चाहिये.. निश्चित रूप से फ़िल्म में इन सब पहलुओं को उभारने में फ़िल्म की एडिटिंग कमाल करती है ..मैं ठीक उस वक़...